कालसर्प दोष निवारण: राहु-केतु जनित बाधाओं से मुक्ति हेतु दिव्य वैदिक अनुष्ठान
कालसर्प दोष का धार्मिक महत्व
वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब जन्म कुंडली के सभी सात प्रमुख ग्रह राहु और केतु के मध्य स्थित हो जाते हैं, तब कालसर्प दोष का निर्माण होता है। ऐसी मान्यता है कि इस योग के कारण व्यक्ति को मानसिक तनाव, कार्यों में विलंब, पारिवारिक चुनौतियों तथा जीवन में बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
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कालसर्प दोष निवारण पूजा का महत्व
धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस विशेष अनुष्ठान में भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान महेश की दिव्य कृपा का आह्वान किया जाता है। माना जाता है कि विधिपूर्वक संपन्न पूजा से साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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उज्जैन में कालसर्प दोष निवारण
प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उज्जैन को कालसर्प दोष निवारण के लिए अत्यंत पवित्र स्थल माना गया है। यहाँ पवित्र क्षिप्रा नदी में स्नान, नाग-नागिन स्वरूप की पूजा तथा वैदिक विधि से संपन्न अनुष्ठान को विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु इस पूजा के माध्यम से कर्मजनित बाधाओं की शांति, मानसिक संतुलन तथा सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
